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कैसे बने ज्ञान के भंडार?

दोस्तों हमारे दैनिक जीवन में हम कुछ लोगों से मिलते हैं जिनका सामान्य ज्ञान और जवाब देने की क्षमता औरों से अलग होती है, उनके वाक्पटुता और सोचने की क्षमता गजब की होती है और उनको लगभग हर क्षेत्र की थोड़ी बहुत जानकारी होती ही है | जब की कुछ लोग तेजी से प्रतिक्रिया नहीं दे पाते तथा उनका सामान्य ज्ञान उतना अच्चा नहीं होता. इसका सीधा सम्बन्ध आपकी अन्दर मौजूद ज्ञान कोष और याद रखने की क्षमता पर निर्भर करता है, हम आपको कुछ टिप्स बताएँगे जिनको अपनाकर आप भी अपने अन्दर एक ज्ञानकोष स्थापित कर सकते हैं.

 

आइये जानते है आप अपने अन्दर एक ज्ञानकोष कैसे स्थापित कर सकते है

ü स्वाभाविक उत्सुकता : उत्सुकता या जिज्ञासा – मतलब किसी चीज के बारे में जानने की इच्छा, उत्सुकता जिस व्यक्ति की अन्दर जिज्ञासा ज्यादा होती है या जो व्यक्ति स्वाभाव से ही उत्सुक होता है उसको किसी भी चीज को जानने व समझने की इच्छा होती है और यही इच्छा उसको रिसर्च करने की प्रेरणा देती हैं. यदि आपको जानना है तो आप सौ तरीके खोजते हैं जानकारी प्राप्त करने की और फिर आप कई माध्यमो से गुजरते हैं इस प्रक्रिया में आपको कई और जानकारियां प्राप्त होती है जो आपको ज्ञान कोष बनाने में मदद करती हैं / तो दोस्तों अगर आपको आगे रहना है तो आपको अपने भीतर जिज्ञासा पैदा करनी होगी, चीज कोई भी हो जो हमारे सामने से गुजरे या हमारी दिनचर्या में शामिल हो उसके बारे में जरुर जानने की कोशिश करें और इस काम में आपको इन्टरनेट काफी मददगार साबित होगा, GOOGLE के पास लगभग हर अर्थपूर्ण चीज का उत्तर मिल सकता हैं //

ü प्रश्न पूछने का साहस करें : जिज्ञासु होने के साथ साथ आपको अन्दर प्रश्न पूछने की काबिलियत होता अतिआवश्यक है, और इसकी शुरुआत होती है क्यों ? कहाँ? कब? कैसे? क्यों है कहाँ है कब से है और कैसे होता है ? किसी चीज के बारे में खुद से पूछें और जब आप खुद से सवाल करेंगे तो जवाब नहीं मिलने पर आप दुसरो से सवाल करेंगे, कुछ लोग सोचते हैं की यदि वे प्रश्न पूछेंगे तो लोग समझेंगे की उनका सामान्य ज्ञान कम है लेकिन “ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसको सब पता हो” दरअसल Google को भी सब कुछ नहीं पता है उसको उतना ही पता है जितना उसको बताया जाता है लोगों द्वारा, तो फिर आप को किसी से कुछ प्रश्न करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए/ जिनता ज्यादा आप प्रश्न पूछेंगे आपका ज्ञान कोष मजबूत होता रहेगा/  ज्यादा से ज्यादा ऐसे लोगों के संपर्क में रहे जो आपको कुछ नहीं तो कम से कम आपको जानकारी दे सकें और जो खुद जिज्ञासु स्वाभाव का हो//

ü ऐसा क्यूँ है ? : आपके आसपास बहुत सारे घटनाक्रम चलते रहते हैं आपको ओब्सेर्वे करते रहना चाहिए आँख कान खुले रखिये आपको बहुत सारी चीजे ऐसी दिखेगी जिनको देखकर लगेगा की ऐसा क्यों और कैसे? अपने आप से पूछे कुछ के जवाब स्वयं मिल जायेंगे और कुछ आपको जानना होगा दुसरो से/ तो बस आपके ज्ञानकोष में एक और अध्याय जुड़ता जायेगा/ आपके माता पिता भी आपका अच्चा मार्गदर्शन कर सकते हैं क्यूंकि जो जीवन के अनुभव आपको वो दे सकते हैं वो कही और से नहीं प्राप्त हो सकता, बात कीजिये खुलकर और अपनी राय भी रखिये खुलकर//

ü तर्क करें अपने आप से और दूसरों से : जानवरों को ज्ञान है लेकिन केवल पमनुष्य ही तर्क कर सकते हैं जितना बेहतर आप आगे कह सकते हैं आप जानवरों से खुद को अलग कर सकते हैं, तर्क आपको सिखाता है कि पहले से मौजूद तथ्यों से अज्ञात सत्य कैसे प्राप्त किया जाए। तर्क आपको सिखाता है कि जो आपको लगता है की यह सत्य है क्या वह वाकई सत्य है। सच को सुनिश्चित करने के लिए तर्क आवश्यक है लेकिन ध्यान रहे कुतर्क नहीं / एक प्रस्ताव में सभी बिंदुओं की तुलना करें समानता को ध्यान दें – जो आपको कुछ नया बताता है अंतर को नोट करें – जो आपको कुछ नया बताता है तब नई चीजें ले लीजिए जो आपने पाई हैं और स्थापित कानूनों या सिद्धांतों के खिलाफ उन्हें जांचें। यह तर्क है, यह कारण है, यह ज्ञान अपने उच्चतम रूप में है//

ü चीजों को अपने स्तर पर परिभाषित करें : आपके आसपास मौजूद हर छोटी बड़ी चीज को आप परिभाषित करने का प्रयास करे, जैसे कुर्शी , मेज कंप्यूटर , मोबाइल , हैंडपंप, पेड़ पौधे इत्यादि, परिभाषित करने से पहले आप ये जान लें की परिभाषा किसे कहते हैं  “ एक परिभाषा एक वस्तु के बारे में एक बयान है जिसमें सब कुछ शामिल है और जो कुछ भी नहीं है वह शामिल नहीं है”। एक कुर्सी की परिभाषा में प्रत्येक कुर्सी, चाहे वह रसोई की कुर्सी, एक उच्च कुर्सी, दंत चिकित्सक की कुर्सी या बिजली की कुर्सी होनी चाहिए, इसमें सब कुछ शामिल करना जरूरी है जो कुर्सी नहीं है, यहां तक ​​कि उन चीजों को भी जो पास आते हैं, जैसे कि स्टूल, एक बेंच, एक सोफे, अब आप पूछेंगे की ऐसा करने से क्या होगा तो मुझे अफसोस है कि जब तक आप कुर्सी या दरवाजा (या हर अन्य परिचित वस्तुओं) को परिभाषित नहीं कर सकते, तब तक आप वास्तव में नहीं जानते हैं कि ये क्या हैं। आपके पास उन्हें पहचानने और उनका वर्णन करने की क्षमता है लेकिन आप ये नहीं बता सकते कि उनका स्वभाव क्या है। आपका ज्ञान सही नहीं है//

ü टेक्नोलॉजी को हथियार बनाये : समाचार पत्र पढने का समय शायद न मिलता हो आपको लेकिन आज आपके हाथ में मोबाइल है और आपको इतना समय जरुर मिल जायेगा जब आप मोबाइल में ही समाचार पढ़ सकते हैं और अपने आपको अपडेट रख सकते हैं, आपका स्मार्ट फ़ोन आपको असीमित जानकारियां दे सकता है जरुरत है आपको इसका सही उपयोग करने की, आपको सामान्य ज्ञान की से सम्बंधित हर जानकारी इन्टरनेट से प्राप्त हो जाती है वो भी बड़ी आसानी से जरुरत है तो बस सही इस्तेमाल की !

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